दरभंगा। इस्लाम के पवित्र माह रमजान के पहले जुम्मा पर शहर में रोजेदार नमाजियों का उत्साह चरम पर रहा। शुक्रवार को जुम्मे की नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शहर की प्रमुख मस्जिदों में पहुंचे। सुबह से ही मस्जिदों और आसपास के इलाकों में चहल-पहल बढ़ गई थी। नमाज के दौरान आध्यात्मिक माहौल के बीच उमड़ी भीड़ ने शहर की धार्मिक रौनक को और बढ़ा दिया।
जुम्मे की नमाज से पूर्व बाकरगंज जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मंजर कासमी ने रोजे की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम में रोजा एक अनिवार्य इबादत है। हर मुसलमान पर रोजा रखना उतना ही जरूरी है, जितना नमाज पढ़ना, हज करना और जकात अदा करना। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने रोजेदारों को उनकी इबादत का विशेष सवाब देने का वादा किया है।
मौलाना कासमी ने रोजेदारों से अपील की कि रमजान के इस पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें तथा भाईचारा और अमन-चैन को मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि रमजान आत्मसंयम, सब्र और परोपकार का महीना है।
पहले जुम्मा को लेकर बाकरगंज, लहेरियासराय, मौलागंज, करमगंज और दरभंगा टावर चौक स्थित मस्जिदों में विशेष भीड़ देखी गई। नमाज से पहले ही मस्जिदों में जगह कम पड़ने लगी, जिसके कारण कई नमाजियों को परिसर और सड़कों पर चटाई बिछाकर नमाज अदा करनी पड़ी। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से सीमित व्यवस्था की गई थी, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा।
हालांकि धार्मिक उत्साह के बीच कई मस्जिदों की बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी उठे। कुछ स्थानों पर वुजूखाना की साफ-सफाई, पेयजल की कमी और जूता-स्टैंड की अपर्याप्त व्यवस्था की शिकायत नमाजियों ने की। उनका कहना था कि रमजान में हर वर्ष भीड़ बढ़ती है, लेकिन सुविधाओं के विस्तार पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और मस्जिद कमेटियों से अपील की है कि आगामी जुम्मों को देखते हुए सफाई, पानी, रोशनी और भीड़ नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कई सामाजिक संगठनों के स्वयंसेवक भी मस्जिदों के बाहर व्यवस्था संभालते नजर आए।
नमाज के बाद बाजारों में भी रौनक बढ़ गई। लोग इफ्तार की तैयारी के लिए खरीदारी करते दिखे। कुल मिलाकर रमजान के पहले जुम्मा ने शहर के धार्मिक माहौल को जीवंत कर दिया, साथ ही व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत भी उजागर कर दी।