दरभंगा। ब्यूरो रिपोर्ट। https://darbhangalivenews.com
4 दिसंबर 2025 को हिंदू जागरण सेवा समिति द्वारा मां श्यामा मंदिर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम लड़की जरीना खातून की शादी एक हिंदू युवक के साथ हिंदू रीति-रिवाज से कराए जाने पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में नफीसुल हक रिंकू ने दरभंगा जिलाधिकारी कौशल कुमार से मुलाकात कर विस्तृत जांच एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
“धर्म परिवर्तन के बिना मंदिर में विवाह असंवैधानिक” — नफीसुल हक रिंकू
जिलाधिकारी को सौंपे आवेदन में रिंकू ने कहा कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम में एक मुस्लिम लड़की की शादी मंदिर परिसर में हिंदू विधि-विधान से कराई गई, जबकि न लड़की का धर्म परिवर्तन हुआ और न ही विवाह निबंधक कार्यालय में पंजीकरण की प्रक्रिया की गई।
उन्होंने कहा—
“संवैधानिक रूप से वयस्क लड़का–लड़की विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन यह विवाह निबंधक कार्यालय में होना चाहिए। दूसरे धर्म के धार्मिक स्थल में विवाह तभी संभव है जब संबंधित व्यक्ति विधिवत धर्म परिवर्तन करे। ऐसे में मंदिर में बिना धर्म परिवर्तन के मुस्लिम लड़की का विवाह कराया जाना आपत्तिजनक और कानूनन गलत है।”
रिंकू ने दावा किया कि आयोजन से जुड़े लोगों से लड़की की जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। केवल “झारखंड से आने” की बात कही गई, जबकि लड़की का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
“सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा तनाव”
नफीसुल हक रिंकू ने आरोप लगाया कि आयोजन के बाद समिति के संस्थापक एवं पूर्व विधायक अमरनाथ गामी के सोशल मीडिया पोस्ट ने स्थिति को और भड़काया। उनके कुछ समर्थकों ने भी ऐसे ही पोस्ट साझा किए, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में नाराजगी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तियों ने भी इस कार्यक्रम में प्रमुखता से हिस्सा लिया, जो मामले को और संवेदनशील बनाता है। उन्होंने एक चिकित्सक सहित कई सहयोगकर्ताओं पर भी “असंवैधानिक गतिविधि को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया।
DM बोले— “मामले की जांच कराई जाएगी”
प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के दौरान जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि—
“मामले की जानकारी आवेदन के माध्यम से प्राप्त हुई है। आवश्यक विवरण प्राप्त कर जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
रिंकू ने स्पष्ट किया कि यदि जांच के उपरांत कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होंगे।
मामला संवेदनशील, कानून-व्यवस्था पर उठे प्रश्न
यह पूरा मामला धार्मिक स्थल, सामूहिक विवाह, अंतर–धार्मिक विवाह और प्रक्रिया का पालन न किए जाने से जुड़े सवालों को जन्म देता है। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि इससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है, जबकि प्रशासन पर जल्द कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।








