क्या रसूखदार आरोपियों के आगे फेल हो गया सिस्टम? | Darbhanga POCSO Case Latest News
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दरभंगा जिले में POCSO Act (पॉक्सो कानून) के तहत दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म का मामला अब पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन गया है। प्राथमिकी दर्ज हुए 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं प्रभाव और रसूख के आगे कानून बेबस तो नहीं हो गया?
महिला थाना से न्याय तक की लड़ाई: आवेदन लौटा, बयान लीक!
मामला कई महीनों पुराना बताया जा रहा है, लेकिन 3 दिसंबर 2025 को यह केस तब सुर्खियों में आया, जब पीड़िता महिला थाना पहुंची।
👉 आरोप है कि महिला थाना पुलिस ने आवेदन लेने से इनकार कर दिया और “सुधार कर लाने” की बात कहकर पीड़िता को लौटा दिया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि थाना परिसर में मौजूद एक सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्ति ने पीड़िता का बयान लेकर सार्वजनिक कर दिया, जो कि नाबालिग की पहचान और गोपनीयता के कानून का खुला उल्लंघन है।

कथावाचक और ‘मौनी बाबा’ पर आरोप, धर्म की आड़ में बचने की कोशिश?
इस मामले में आरोपी बताए जा रहे कथावाचक और तथाकथित ‘मौनी बाबा’ पर यह आरोप है कि वे धार्मिक प्रवचन और आयोजनों के जरिए खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, एक महिला संगठन से जुड़ी पदाधिकारी द्वारा सोशल मीडिया पर पीड़िता और उसकी मां पर सवाल उठाए जाने से महिला संगठनों की भूमिका भी विवादों में आ गई है।
मीडिया दबाव के बाद FIR, फिर भी गिरफ्तारी शून्य
लगातार दबाव और मीडिया रिपोर्टिंग के बाद 19 दिसंबर 2025 को महिला थाना ने पीड़िता का आवेदन स्वीकार किया और POCSO Act के तहत FIR दर्ज की गई।
हालांकि,
❗ इतने संवेदनशील मामले में पुरुष अनुसंधानकर्ता की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई गई।
❗ पीड़ित परिवार की शिकायत पर डीआईजी ने SIT गठन और अनुसंधानकर्ता बदलने का आश्वासन दिया।
लेकिन 12–13 दिन बीत जाने के बावजूद
➡️ एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं
➡️ चाचा-भतीजा बताए offering आरोपी खुलेआम घूमते देखे जा रहे हैं

कोर्ट बयान से बढ़ी मुश्किलें, समझौते का दबाव!
नाबालिग पीड़िता का न्यायालय में दर्ज बयान इस केस को और गंभीर बनाता है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि
👉 अपराध को दबाने के लिए लगातार दबाव बनाया गया
👉 समझौते की कोशिशें की गईं
👉 कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है
इससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामले में और भी अप्राथमिकी आरोपी हो सकते हैं।
मेडिकल जांच में देरी, रात में दबाव – मानसिक उत्पीड़न का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि
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FIR के बाद मेडिकल जांच और बयान दर्ज कराने में करीब 5 दिन की देरी की गई
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रात करीब 10 बजे पुलिस पीड़िता के घर पहुंची और घटना स्थल दिखाने का दबाव बनाया
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नाबालिग बच्ची को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया
परिजनों का कहना है कि रसूखदार लोग लगातार दबाव बनाकर केस को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या दरभंगा में पॉक्सो कानून सिर्फ कागज़ों में है?
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❓ 13 दिन बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
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❓ क्या आरोपी राजनीतिक या सामाजिक रूप से प्रभावशाली हैं?
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❓ क्या नाबालिग को न्याय मिलेगा या मामला लटकता रहेगा?
दरभंगा में यह मामला अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि कानून, प्रशासन और न्याय व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है।
👉 पूरे मामले पर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतज़ार है।







